ग्रामीण विकास एजेंसी

परिचयः

दिसंबर 1997 के दौरान एक नए जिले के रूप में दीमापुर की घोषणा और उद्घाटन के परिणामस्वरूप, डी. आर. डी. ए. दीमापुर को नागालैंड में आठ डी. आर. डी. ए. के रूप में 1 अप्रैल 1999 से प्रभावी बनाया गया था। डी. आर. डी. ए. सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत पंजीकृत एक स्वायत्त निकाय है, जिसके अध्यक्ष डी. सी. हैं। डी. आर. डी. ए. की मुख्य भूमिका और कार्य गरीबी-रोधी, मजदूरी रोजगार कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए योजना बनाना, सफल कार्यक्रम कार्यान्वयन के लिए अन्य एजेंसियों-सरकारी, गैर-सरकारी, तकनीकी और वित्तीय के साथ समन्वय करना है। डी. आर. डी. ए. विभिन्न कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की देखरेख और निगरानी करता है और संबंधित अधिकारियों को दिशानिर्देशों, समानता और रिपोर्टिंग का पालन सुनिश्चित करता है। इसके अलावा, डी. आर. डी. ए. जिले में ग्रामीण विकास मंत्रालय के विभिन्न गरीबी-रोधी कार्यक्रमों के निर्णय लेने और कार्यान्वयन में पारदर्शिता को बढ़ावा देना सुनिश्चित करेगा। डी. आर. डी. ए. का यह कर्तव्य होगा कि वह निगरानी करे और यह सुनिश्चित करे कि लक्षित समूह (एस. सी./एस. टी., महिलाओं और विकलांगों) के लिए विशेष रूप से निर्धारित लाभ उन तक पहुंचे। वे दिशानिर्देशों में परिकल्पित निर्धारित मानदंडों को प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे। कार्यालय का पताः-जिला ग्रामीण विकास एजेंसी परियोजना निदेशक (डी. आर. डी. ए.) दीमापुर का कार्यालय, उपायुक्त कार्यालय, दीमापुर, नागालैंड के पास।
संपर्क नंबरः 8974838534
ईमेलः drdadmr [at] gmail [dot] com

भूमिकाएँ और कार्यः

डी. आर. डी. ए. की मुख्य भूमिका और कार्य गरीबी-रोधी, मजदूरी रोजगार कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए योजना बनाना, सफल कार्यक्रम कार्यान्वयन के लिए अन्य एजेंसियों-सरकारी, गैर-सरकारी, तकनीकी और वित्तीय के साथ समन्वय करना है। डी. आर. डी. ए. विभिन्न कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की देखरेख और निगरानी करता है और संबंधित अधिकारियों को दिशानिर्देशों, समानता और रिपोर्टिंग का पालन सुनिश्चित करता है। इसके अलावा, डी. आर. डी. ए. जिले में ग्रामीण विकास मंत्रालय के विभिन्न गरीबी-रोधी कार्यक्रमों के निर्णय लेने और कार्यान्वयन में पारदर्शिता को बढ़ावा देना सुनिश्चित करेगा। डी. आर. डी. ए. का यह कर्तव्य होगा कि वह निगरानी करे और यह सुनिश्चित करे कि लक्षित समूह (एस. सी./एस. टी., महिलाओं और विकलांगों) के लिए विशेष रूप से निर्धारित लाभ उन तक पहुंचे। वे दिशानिर्देशों में परिकल्पित निर्धारित मानदंडों को प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे।

डी. आर. डी. ए. दीमापुर द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं का कार्यान्वयन

जीआईए
मनरेगा
आई. ए. वाई/पी. एम. ए. वाई-(जी)
एनएसआरएलएम
जी. आई. ए. से वी. डी. बी.

जी. आई. ए. आर. डी. विभाग के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है जिसे वी. डी. बी. के माध्यम से लागू किया जाता है। यह एक 100% राज्य प्रायोजित योजना है। इस कार्यक्रम के तहत गाँव के कर-दाता परिवारों को धन आवंटित किया जाता है, जिसमें से 25 प्रतिशत महिलाओं के लिए और 20 प्रतिशत युवाओं के लिए विशेष रूप से आय सृजन गतिविधियों को करने के लिए निर्धारित किया जाता है।

निधि के आवंटन के लिए मानदंड रुपये की दर से बनाया गया है। 66, 000/- वीडीबी के लिए जिसमें 66 घर और उससे कम हैं और रु। 67 और उससे अधिक परिवारों वाले वीडीबी के लिए प्रति परिवार 1000/-।
इस कार्यक्रम के तहत, वीडीबी कल्याण कोष के खिलाफ रुपये की दर से एक अनिवार्य जमा किया जाता है। 50 और उससे कम घरों वाले गांवों के लिए 10,000/- और रु। 51 और उससे अधिक घरों वाले वीडीबी के लिए प्रति परिवार 200 रुपये। वी. डी. बी. के लिए अपनी गतिविधि के पूरक के रूप में संसाधन जुटाने के लिए सामान्य आवंटन से जमा किए जाते हैं।
वार्षिक जमा 5 वर्ष की अवधि के लिए किया जाता है और विभाग के निर्देश के बिना वीडीबी द्वारा राशि नहीं निकाली जा सकती है।
इस कार्यक्रम के तहत निम्नलिखित आय सृजन योजनाएं शुरू की गई हैं।
बुनाई और हथकरघा
कृषि और बागवानी गतिविधियाँ
सामुदायिक बस की खरीद
खेल के मैदान का निर्माण
सुअर पालन
मुर्गी पालन आदि।
मैचिंग कैश ग्रांट (एमसीजी)
यह एक राज्य प्रायोजित कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य वी. डी. बी. संसाधनों को जुटाना है। इस योजना के तहत सभी वीडीबी के लिए वाणिज्यिक बैंक में सावधि जमा (एफडी) खाता खोलना अनिवार्य है।
सावधि जमा शुरू में 5 (पाँच) वर्ष की अवधि के लिए खोला जाता है और परिपक्वता पर नवीनीकृत किया जाता है। प्रोत्साहन के रूप में, राज्य सरकार इस कार्यक्रम के तहत अधिकतम 2.5 लाख तक का नकद अनुदान प्रदान करती है।
माइक्रो वित्त
यह रुपये की एक कार्पस फंड योजना है। 2. 40 लाख रुपये के अनुपात में वीडीबी, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के योगदान के माध्यम से बनाया गया है। 40, 000/- वीडीबी द्वारा और रु। राज्य द्वारा 1 लाख और अन्य रु। केंद्र सरकार द्वारा 1 लाख।
जीआईए के तहत सफलता की कहानियों की कुछ तस्वीरें निम्नलिखित पृष्ठों में देखी जा सकती हैं
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम
मनरेगा योजना हमारे जिले में वर्ष 2008 में भारत सरकार द्वारा 7 सितंबर 2005 की मनरेगा अधिसूचना के अनुसार शुरू की गई थी।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक हैं, को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करके ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए प्रति दिन संशोधित दर Rs.177 है।
यह योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे केंद्र और राज्य के बीच 90:10 अनुपात में लागत बंटवारे के आधार पर लागू किया जाता है।
मनरेगा के तहत लागू किए गए कुछ अनुमत कार्य इस प्रकार हैंः –
जल संरक्षण और जल संचयन।
वनरोपण और वृक्षारोपण सहित सूखा बचाव।
सूक्ष्म और लघु सिंचाई कार्यों सहित सिंचाई नहरें।
पारंपरिक जल निकायों का नवीनीकरण।
बाढ़ नियंत्रण और संरक्षण।
जब भी आवश्यक हो गांव के भीतर पुलिया और सड़कों सहित ग्रामीण संपर्क।
प्रखंड स्तर पर बी. एन. आर. जी. एस. के. और ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम पंचायत भवन का निर्माण।
कृषि संबंधी कार्य।
भूमि विकास।
पशुधन संबंधी कार्य।
ग्रामीण पेयजल संबंधी कार्य।
ग्रामीण स्वच्छता संबंधी कार्य आदि।
दीमापुर जिले के तहत मनरेगा का कार्यान्वयन

दीमापुर जिले में आमतौर पर मनरेगा के तहत किए जाने वाले कुछ कार्य इस प्रकार हैंः –

ग्रामीण संपर्क
सिंचाई
बाढ़ नियंत्रण और सुरक्षा
परिषद कक्ष/पंचायत भवन का निर्माण।
जल संरक्षण और जल संचयन।
सूखे का सबूत
भूमि विकास
संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत, कुछ नए कार्यों को कृषि संबंधी कार्यों, मत्स्य पालन और पशुधन संबंधी कार्यों जैसे अनुमत कार्यों के तहत शामिल किया गया है।
इसलिए विभाग पिछले वित्तीय वर्ष से मनरेगा कार्यक्रम के तहत इन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
एसएजीवाई

इस एसएजीवाई कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानमंत्री ने 11 अक्टूबर 2011 को किया था। एसएजीवाई के दिशा-निर्देशों के अनुसार, देश में प्रत्येक सांसद पहाड़ी, जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में एक ग्राम पंचायत की पहचान करेगा, जिसकी आबादी 1000-3000 है। इस तरह हमारे लोकसभा सांसद ने चुमुकेडिमा ब्लॉक के तहत सेलौफे गांव को एमपी मॉडल गांव के रूप में चुना है, जिसके लिए सेलौफे स्थानीय मैदान में एक एम्फीथिएटर के निर्माण के लिए परियोजना की पहचान करके पहले दौर की कवायद शुरू हो चुकी है। एम्फीथिएटर तक पक्की अप्रोच रोड के निर्माण की पहचान एमपी द्वारा मनरेगा के साथ एसएजीवाई के अभिसरण के लिए की गई है, जिसके लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए तैयार किया जा रहा है।

पीएमएवाई (जी)
आई. ए. वाई. कार्यक्रम ग्रामीण गरीबों को आवास प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। हालांकि, अब इसका नाम आईएवाई इंदिरा आवास योजना से बदलकर पीएमएवाई (जी) प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण 1 अप्रैल 2016 से कर दिया गया है। यह एक केंद्र प्रायोजित कार्यक्रम है जहां धन को केंद्र और राज्य के बीच क्रमशः 90:10 अनुपात के आधार पर साझा किया जाता है।
इस कार्यक्रम के तहत लाभार्थियों को आवासीय घरों के निर्माण के लिए छत की सामग्री प्रदान की जाती है। श्रम और अन्य स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्रियों का योगदान समुदाय और लाभार्थी दोनों द्वारा किया जाता है।
इस कार्यक्रम के तहत सभी 213 गाँवों को शामिल किया गया है। हालांकि, वर्ष 2014-15 के दौरान, प्रत्येक ब्लॉक के तहत एक गांव को IAY कार्यक्रम के पहले चरण के लिए चुना गया था, जिसका उद्देश्य 100% CGI शीट रूफिंग को कम समय के भीतर कवर करना था ताकि कार्यक्रम के तहत सफलता की कहानियों को मूर्त तरीके से लाया जा सके।
नवंबर 2014 के महीने में अंतिम आवंटन के दौरान सभी 4 चयनित गांवों को सीजीआई शीट के 100 बंडल प्रदान किए गए थे।
अगले चरण में कार्यक्रम के तहत शेष 2 ब्लॉकों के तहत अन्य 2 गांवों को शामिल किया जाएगा। प्रति ब्लॉक 1 (एक) मॉडल गांव का चयन कार्यक्रम के तहत एक वार्षिक गतिविधि होगी। इस प्रायोगिक कार्यक्रम के 3 (तीन) वर्षों की अवधि के भीतर अपने लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीद है।
पीएमएवाई (जी) के तहत वर्ष 2015-16 के लिए जियो-टैगिंग पहले ही शुरू की जा चुकी है। पीएमएवाई (जी) के तहत पूरा किए गए घरों की तस्वीरें क्लिक की जाएंगी और आवास ऐप का उपयोग करके अपलोड की जाएंगी। जियो-टैगिंग प्रक्रिया में भौगोलिक निर्देशांक जैसी स्थान विशिष्ट जानकारी को चित्र से जोड़ना शामिल है।
एनएसआरएलएम
एन. एस. आर. एल. एम. कार्यक्रम के तहत, दीमापुर जिले के तहत चुमुकेडिमा ब्लॉक (संसाधन ब्लॉक) और मेडज़ीफेमा ब्लॉक (गहन ब्लॉक) का चयन किया गया है। इस वित्त वर्ष में न्यूलैंड ब्लॉक को एक गहन ब्लॉक के रूप में लिया गया है।
इस कार्यक्रम के तहत चुमुकेडिमा ब्लॉक के तहत 49 गांव और मेदजिफेमा ब्लॉक के तहत 26 गांव शामिल हैं
चुमुकेडिमा के तहत 445 एसएचजी की पहचान की गई है, जिनमें से 179 एसएचजी पूरी तरह से एनआरएलएम द्वारा बनाए गए थे।
मेदजिफेमा के तहत 86 एसएचजी की पहचान की गई है। 5 सी. आर. पी. दौर पूरा हो चुका है, और 4 सी. आर. पी. दौर का अनुवर्ती कार्य पूरा हो चुका है।
रुपये का रिवॉल्विंग फंड। 401 एसएचजी को 15,000/- रुपये की स्टार्ट अप लागत प्रदान की गई। चुमुकेडिमा ब्लॉक के तहत 154 एसएचजी को 2000/- रुपये प्रदान किए गए
रुपये का रिवॉल्विंग फंड। 38 एसएचजी को 15,000/- रुपये प्रदान किए गए। रुपये की शुरुआती लागत। 2000/- मेडजिफेमा ब्लॉक के तहत 18 एसएचजी को प्रदान किया गया था
चुमुकेडिमा ब्लॉक के तहत 21 ग्राम स्तरीय संगठनों का गठन किया गया है।
21 वी. एल. ओ. को सी. आई. एफ. (सामुदायिक निवेश कोष) प्रदान किया गया है
वी. एल. ओ. के लिए प्रारंभ लागत 21 वी. एल. ओ. को प्रदान की गई थी।
दीमापुर जिले में एनआरएलएम के तहत शुरू की गई प्रमुख गतिविधियों में रबड़ के बागान, सुअर पालन, सर्फ बनाना, डिश धोने का साबुन, बुनाई आदि शामिल हैं।
एन. आर. एल. एम. के तहत सफलता की कहानियों की कुछ तस्वीरें निम्नलिखित पृष्ठों में देखी जा सकती हैं।

डी. आर. डी. ए. दीमापुर वर्तमान में 2013 के सरकारी मान्यता प्राप्त गाँवों और छह (6) ग्रामीण विकास ब्लॉकों-मेडज़ीफेमा, चुमुकिडेमा, नियुलैंड, कुहुबोटो, अघुनका, धनसिरीपार ब्लॉक को कवर कर रहा है जिसमें कुल 73251 परिवार शामिल हैं। डी. आर. डी. ए. दीमापुर में गाइड लाइन के अनुसार केवल छह (6) ब्लॉक ‘ए’ श्रेणी के हैं और भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा निर्धारित डी. आर. डी. ए. के लिए कुल 25 अधिकारियों और कर्मचारियों की अनुमति है। दीमापुर में वर्तमान कर्मचारियों की संख्या 239 है, जिनमें से 59 कर्मचारी डी. आर. डी. ए. से हैं और 180 कर्मचारी ब्लॉकों से हैं।

दीमापुर जिले के तहत संपर्क विवरणः –

sl.no कार्यालय का स्थान संपर्क नंबर
1 डीआरडीए दीमापुर 8974838534